अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

ख़्वाब

मैंने देखा एक ख़्वाब,
एक बेहद हसीन ख़्वाब !

 

ख़्वाब में मैं था, तुम थीं,
रूमानियत के लमहे थे,
और मीठी-सी मदहोशी छाई थी दिलोदिमाग पर 
तुम्हारी चाहत की।

 

ख़्वाब में बैठे थे हम दोनों किसी झील या नदी के किनारे,
शायद बंगला साहिब का सरोवर था, या फिर यमुना का कोई किनारा,
हम दोनों ही बैठे थे ख़ामोश, बिना एक लफ़्ज़ भी बोले,
लगता था जैसे,
शब्द मैला कर देंगे उन शुभ्र जादुई पलों को,
बुझा देंगे उस अद्भुत दिव्यता की लौ को। 
उस ख़ामोशी में कितना कुछ बयां कर दिया था हम दोनों ने ही।

 

मैं थामे था तुम्हारा हाथ अपने हाथों में, 
महसूस कर रहा था उस स्नेहिल स्पर्श की शाश्वत् गर्माहट। 
मैंने कसकर थाम ली थी तुम्हारी कलाई,
जैसे कभी जुदा नहीं होने दूँगा तुम्हें ख़ुद से,
लड़ जाऊँगा भाग्य से,
मोड़ दूँगा नियति की दिशा,
झुठला दूँगा क़िस्मत के लिखे को।

 

और, 
भरा जा रहा था मैं संतोष से, परम तृप्ति के एहसास से,
कि पा लिया है तुम्हें,
तुम, जो जन्मी हो मेरी तपस्या से....मेरे प्यार की तपस्या,
तुम, जो जन्मी हो मेरे लिए,
सिर्फ मेरे लिए.....

 

मैंने देखा एक ख़्वाब,
एक बेहद हसीन ख़्वाब........!

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

अनूदित कहानी

शोध निबन्ध

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं