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श्रद्धांजलि

सारा देश कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए अपने वीर-जवानों की शहादत को लेकर ग़म और ग़ुस्से में था। सारी जनता की आँखें नम थीं और जगह-जगह शोक सभा तथा कैंडल मार्च किये जा रहे थे। इसी सिलसिले में सत्ता पार्टी के एक स्थानीय एमएलए साहेब ने भी आतंकी हमले विरोध में एक जुलूस निकला था। जुलूस में शामिल हज़ारों लोगों के हाथों में तिरंगे और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' लिखी तख्तियाँ थीं। जुलूस के बीच से गगनभेदी नारों की आवाज़ आ रही थी... पाकिस्तान मुर्दाबाद... हिंदुस्तान ज़िंदाबाद...भारत माता की जय...वंदे मातरम...वगैरह वगैरह...! इस विशाल जन सैलाब का नेतृत्व करते हुए नेताजी जिस चौक-चौराहे से गुज़रते, वहाँ उपस्थित लोगों में भी राष्ट्र-भक्ति की भावना उबाल मारने लगती।

जुलूस के गंतव्य पर पहुँचते ही नेताजी अपनी पूर्व निर्धारित योजना के मुताबिक मीडिया से मुख़ातिब हुए और शुरू हो गये, "यह जुलूस हम उन शहीद हुए वीर जवानों की यादों में निकाले हैं... यह एक 'श्रद्धांजली' है उनके लिए...इस तरह के आयोजन से आम लोगों में राष्ट्र भक्ति की भावना का संचार होता है...पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा... उसके नापाक इरादे को मटिया-मेट करना होगा...इधर के भी कुछ गद्दारों को सज़ा देनी होगी" ...इत्यादि...।

एक मीडिया वाले ने नेता जी की पोल खोलने के इरादे से  पूछा, "सर, एक व्यक्तिगत सवाल, आपके कितने बच्चे हैं, और वे कहाँ है?" 

"....एक बेटा है जो यू. एस. ए में इंजीनियरिंग कर रहा है, दूसरी बेटी है जो लन्दन में डॉक्टरी कर रही है," नेता जी ने जवाब दिया।

"......तो क्या आप उन्हें सेना में भेजकर राष्ट्र की सेवा के बारे में कभी नहीं सोचा?"

एमएलए साहिब की शक्ल अब देखने लायक थी ...मानो किसी ने उनकी कमज़ोर सतह को छू लिया हो...! मीडिया से कटते हुए ,अपने काँपते हाथों से रुमाल निकाल कर कपार पे उगी पसीने की नन्ही बूंदों को पोंछते हुए नेताजी अपने कार्यकर्ताओं को सभा के समापन का निर्देश देने में लग गये.....!

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