चिन्ता
काव्य साहित्य | कविता सौरभ नोरोजी15 Jun 2026 (अंक: 299, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
तुम ताना दो तुम गाली दो,
पर मैं कुछ न कह पाऊँगा।
तुम ज्ञान बताओ दुनिया को,
मैं न तुमसे ले पाऊँगा।
जो सीखा दिया है ज्ञान आपने,
वो मैं सबको दिखलाऊँगा।
ज्ञान बड़ा अनमोल रत्न है,
मैं आगे बढ़ जाऊँगा।
लोग कहेंगे पागल मुझको,
मैं कुछ न कह पाऊँगा।
माना मुझको ज्ञान बहुत पर,
जीत न तुमसे पाऊँँगा,
चिंता आपको खाये जाती,
मैं कुछ कर भी पाऊँगा।
साथ रहा सदैव आपका,
मैं दुनिया को दिखलाऊँगा।
क्या हस्ती मुझे बनाया था,
क्या हस्ती मैं बन जाऊँगा?
चिंता आपको खाये जाती,
क्या मैं आगे बढ़ पाऊँगा?
आपको केवल चिंता एक है,
नौकरी में पा जाऊँ।
सफल हो जाऊँ जीवन में इतना,
ख़ुशियाँ सारी दे पाऊँ।
(पिताजी को समर्पित)
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