नारी की पहचान
काव्य साहित्य | कविता - हाइकु बबिता कुमावत1 Jan 2026 (अंक: 291, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
1.
क़लम उठी,
नारी आकाश छूती—
ज्ञान है पंख।
2.
आँखों में दीप,
पुस्तक से भविष्य—
नारी सशक्त।
3.
चुप्पी टूटी है,
शब्द राह दिखाते
शिक्षा की जीत।
4.
दुनिया तक,
बदली पहचान—
नारी उन्नत।
5.
नए सपने,
ख़ुद को पढ़ी नारी—
भाग्य बदला।
6.
अक्षर लौ से,
अँधेरा दूर हुआ—
नारी है जागी।
7.
ज्ञान ख़ुशबू,
आँचल में भविष्य—
शिक्षा की जीत।
8.
ज्ञान की सीढ़ी,
नारी ख़ूब चढ़ती—
छूती गगन।
9.
क़लम शक्ति,
शब्दों से टूटी बेड़ी—
नारी स्वतंत्र।
10.
कठिन राह,
उत्तर खोजती है—
बुद्धि उजली।
11.
पढ़ी है नारी,
पीढ़ियाँ रोशन है—
देश सशक्त।
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