अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

नारी की पहचान

 

1.

क़लम उठी, 

नारी आकाश छूती—

ज्ञान है पंख।

 

2.

आँखों में दीप, 

पुस्तक से भविष्य—

नारी सशक्त।

 

3.

चुप्पी टूटी है, 

शब्द राह दिखाते

शिक्षा की जीत।

 

4.

 दुनिया तक, 

बदली पहचान—

नारी उन्नत।

 

5.

नए सपने, 

ख़ुद को पढ़ी नारी—

भाग्य बदला।

 

6.

अक्षर लौ से, 

अँधेरा दूर हुआ—

नारी है जागी।

 

7.

ज्ञान ख़ुशबू, 

आँचल में भविष्य—

शिक्षा की जीत।

 

8.

ज्ञान की सीढ़ी, 

नारी ख़ूब चढ़ती—

छूती गगन।

 

9.

क़लम शक्ति, 

शब्दों से टूटी बेड़ी—

नारी स्वतंत्र।

 

10.

कठिन राह, 

उत्तर खोजती है—

बुद्धि उजली।

 

11.

पढ़ी है नारी, 

पीढ़ियाँ रोशन है—

देश सशक्त।

 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

15 अगस्त कुछ हाइकु
|

आओ मनायें सारे मिल के साथ दिन ये शुभ  …

28 नक्षत्रों पर हाइकु
|

01. सूर्य की पत्नी साहस व शौर्य की माता…

अक्स तुम्हारा
|

1. मोर है बोले मेघ के पट जब गगन खोले। …

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता - हाइकु

सामाजिक आलेख

कविता

लघुकथा

कहानी

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं