अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

पीते-पीते आज करीना

पीते-पीते आज करीना
बात पते की बोल गयी

 

यह तो सच है शब्द हमारे
होते हैं घर-अवदानी
घर जैसे कलरव बगिया में
मीठा नदिया का पानी

 

मृदु भाषा में एक अजनबी
का वह जिगर टटोल गयी

 

प्यार-व्यार तो एक दिखावा
होटल के इस कमरे में
नज़र बचाकर मिलने में भी
मिलना कैद कैमरे में

 

पलटी जब भी हवा निगोड़ी
बन्द डायरी खोल गयी

 

बिन मकसद के प्रेम-जिन्दगी
कितनी है झूठी-सच्ची
आकर्षण में छुपा विकर्षण
बता रही अमिया कच्ची
 
जीवन की शुरुआत वासना?
समझो माहुर घोल गयी

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अनगिन बार पिसा है सूरज
|

काल-चक्र की चक्र-नेमि में अनगिन बार पिसा…

अबके बरस मैं कैसे आऊँ
|

(रक्षाबंधन पर गीत)   अबके बरस मैं कैसे…

अम्बर के धन चाँद सितारे 
|

अम्बर के धन चाँद सितारे   प्रथम किरण…

अवध में राम आए हैं
|

हर्षित है सारा ही संसार अवध  में  …

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

साहित्यिक आलेख

सामाजिक आलेख

पुस्तक समीक्षा

गीत-नवगीत

ललित निबन्ध

बात-चीत

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं