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क़िस्से जाहिलिस्तान के

उर्दू व्यंग्य 

मूल रचना: कन्हय्या लाल कपूर
अनुवाद: अख़तर अली 

जाहिलिस्तान यानि मूर्खों का देश। यहाँ के नागरिक भी अजीबो-ग़रीब आकार और प्रकार थे। ये लोग ऐसे दो पाँव वाले थे जिनका चार पाँव वाले का अंदेशा होता था। यहाँ ऐसे-ऐसे वकील और ऐसे-ऐसे जेबकतरे थे कि पता ही नहीं चलता था कि इसमें वकील कौन था और जेबकतरा कौन था? ऐसे वैद्य थे जो आँख में जलन का इलाज यह बताते थे कि आँख ही निकलवा दो, न रहेगी आँख और न होगी जलन। ऐसे-ऐसे डाक्टर थे जो गंभीर बीमारियों से भी ज़्यादा ख़तरनाक थे। ऐसे-ऐसे साधू संत हैं जो विगत चौबीस वर्षों से पेड़ की शाख पर उलटे लटके हैं; उनसे कहो कि अब नीचे उतर भी जाओ तो कहते हैं अब तो लटकने की सिल्वर जुबली मना कर ही उतरेंगे। ऐसे-ऐसे स्कूल और कॉलेज हैं जहाँ पढ़ कर छात्र और अधिक अज्ञानी हो जाता है।

इन सब के अतिरिक्त एक अन्य समस्या जाहिलिस्तान की यह थी कि यहाँ के लोग अर्थ का अनर्थ कर देने में विशेष महारथ रखते थे। 

वहाँ के आम चुनाव में एक सौ एक सीटों  के लिए चुनाव की घोषणा की गई। एक पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में समानता का वादा किया और इस बात का विश्वास दिलाया कि यदि हमारी पार्टी सत्ता में आती है तो जाहिलिस्तान में समानता की स्थापना की जायेगी। चुनाव सम्पन्न हुए जिसमें समानता का यह प्रभाव पड़ा कि इस पार्टी के मात्र दस ही जीते और बाक़ी उम्मीदवारों की समान रूप से ज़मानत ज़ब्त हो गई। वहाँ की जनता समानता की बात सुन कर डर गई और ऐसी घोषणा करने वाली पार्टी को हरा कर स्वयं को और देश को बहुत बड़ी समस्या से बचा लिया।

समानता की बात से लोग डर गए। लोग समझे अब हर घर में एक जैसे बच्चे पैदा होंगे, होशियार बच्चे होंगे तो हर घर के बच्चे होशियार होंगे और बुद्धू होंगे तो हर घर के बच्चे बुद्धू होंगे क्योंकि घर-घर में समानता का क़ानून लागू हो जाएगा।  अगर पूरे देश के बच्चे एक जैसे होंगे तो बाप का बापपन ख़तरे में पड़ जाएगा।

हर पति की पत्नी एक जैसी होगी, या तो सबकी ख़ूबसूरत या सबकी बदसूरत। यदि हर पति की पत्नी सुंदर होगी तो फिर देश में सुदरता के प्रति आकर्षण ही ख़त्म हो जायेगा और यदि हर महिला कुरूप होगी तो फिर जीना दुश्वार हो जायेगा।  

हर आदमी का दिमाग़ भी एक जैसा होगा। हर आदमी एक जैसी बीमारी से ही मरेगा। हर अखाड़े में एक जैसे ही पहलवान लड़ा करेंगे। प्रत्येक घर में चूहे बिल्ली और काक्रोच की संख्या एक समान रहेगी। हर इंसान की आयु भी एक जैसी होगी और चपरासी हो या कलेक्टर सब की तनख़्वाह भी एक जैसी ही होगी।

समानता का इतना अच्छा घोषणा पत्र अर्थ का अनर्थ की भेंट चढ़ गया। हारने वाली पार्टी ने अपनी हार पर चिंतन किया और वोटर को जी भर कर गाली दी; लेकिन सार्वजनिक रूप में तो हर प्रजातांत्रिक देश में वोटर भगवान् होता है इसीलिये हार पर इस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त की गई  – पोलिंग अफ़सर बेईमान थे, वोटों की गिनती करने वाले हिसाब में कमज़ोर थे। किसी पराजित प्रत्याशी ने कहा हम इस हार का बदला सत्ता पक्ष से लेकर रहेंगे। इस तरह हर दो-चार दिन में इनका सत्ता पक्ष से टकराव होता रहता था।

एक दिन जाहिलिस्तान की सरकार ने कहा – सूर्य पूरब दिशा से निकल कर पश्चिम दिशा में डूबता है। इस बात का विपक्ष ने बहुत विरोध किया। विपक्ष के नेता ने कहा – सूर्य वाली बात हम सहर्ष स्वीकार कर लेते यदि तुम न बोले होते। हम सरकार के इस बयान की निंदा करते हैं और माँग करते हैं कि प्रधान मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिये।

नारे लगाने और निंदा करने से समस्या का हल नहीं होता है, सरकार के इस बयान पर विपक्ष ने कहा – समाधान करना सरकार का काम है हमारा काम नहीं, हमारा काम हर काम की निंदा करना है, लोकतंत्र में हमको निंदा करने से रोकोगे तो हम इसकी निंदा करेंगे।

अगले ही वर्ष जाहिलिस्तान में विपक्षी दल को सत्तारूढ़ दल की आलोचना करने का एक और सुनहरा अवसर मिल गया। हुआ यह कि जाहिलिस्तान में वर्षा हुई ही नहीं और पूरे देश में ज़बरदस्त सूखा पड़ा। इसके लिए विपक्ष ने सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार की बादलों से मिली-भगत है, अंतिम समय में सरकार ने बादलों को न बरसने के लिए राज़ी कर लिया और उन्हें पड़ोसी मुल्क में बरसने के लिये भेज दिया। यह सरकार ने सिर्फ़ इसलिए किया ताकि वह सूखे पर अपने बेहतर प्रबंधन का प्रदर्शन कर सके।

अब हुआ यह कि इस बरस तो सूखा पड़ा और अगले साल इतनी वर्षा हुई, इतनी वर्षा हुई कि पूरे देश में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। अब जाहिलिस्तान के लोगों ने कहा – यह सरकार  की असफल विदेश नीति का परिणाम है। पड़ोसी देश ने अपने आकाश पर छाये बादलों को भेज-भेज कर पूरे जाहिलिस्तान को पानी-पानी कर दिया है। यहाँ की पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई, सड़क मार्ग का सम्पर्क टूट गया, परिवहन व्यवस्था ठप्प हो गई, परिणाम स्वरूप दैनिक उपयोग की वस्तुओं का दाम आसमान छूने लगे हैं। यह आतंकवादी हरकत है, सरकार को यह मामला अंतराष्ट्रीय परिषद में उठाना चाहिए था पर इस मामले में सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है, अतः सरकार को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिये।

अब जाहिलिस्तान के सभी असंतुष्ट नेता लामबद्ध हो गये और एक मोर्चा बना लिया। अब यह मोर्चा कुत्तों की बढ़ती हुई समस्या पर हड़ताल करता तो कभी ट्रेन में यात्रियों की टिकट चेकिंग के विरोध में हड़ताल करता। अब की बार मोर्चे ने जाहिलिस्तान में अपनी शक्ति प्रदर्शन करने का मन बना लिया और महँगाई को मुद्दा बनाकर देश बंद कराने का फ़ैसला किया। मोर्चा के नेताओं ने अपने भड़काऊ भाषण में जाहिलिस्तान की जानता से आह्वान किया कि आम जानता फलाँ-फलाँ दिन फलाँ-फलाँ समय अपने घर में आग लगाकर सरकार की नीतियों का विरोध करे। जाहिलिस्तान की जनता ने एकता का परिचय दिया और तयशुदा दिन और समय पर अपने-अपने मकानों को आग लगा कर विरोध का प्रदर्शन किया।

अब जाहिलिस्तान में चारों ओर जले हुए मकानों से उठता हुआ धुँआ है, कही राख हो चुके झोंपड़े हैं, हर आँखों में उदासी है, परेशानी है, बस असंतुष्ट दल के नेताओं के चेहरे पर विजयी मुस्कान है।

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