चिड़िया
काव्य साहित्य | कविता सपना साहनी1 May 2026 (अंक: 296, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
चिड़िया सुबह सबसे पहले उठती है
और सबको जगाती है।
चीं-चीं कर अपनी मीठी बोली से
सबका मन लुभाती है।
चिड़िया है तो गगन सुहाना लगता है,
बिना चिड़िया के गगन अधूरा लगता है।
आते-जाते सबको
अपनी मीठी बोली सुनाती है।
है छोटी-सी जान,
पर सबका मन लुभाती है।
अपने बच्चों के लिए
दूर से दाना लाती है,
पेड़ों से फल गिरती है और
सबको फल खिलाती है।
है छोटी-सी जान,
पर सबका मन लुभाती है।
मेहनत करना सिखाती चिड़िया,
निडर बनना सिखाती चिड़िया।
है छोटी-सी जान,
पर बहुत कुछ सिखाती है चिड़िया।
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