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प्यार नहीं तुझसे अब

 

प्यार नहीं तुझसे अब, ये बात दिल ने समझा दी, 
जो तूने दी थी चोटें, वो हर मुस्कान में गिनवा दी। 
 
तेरा नाम अब लब पे नहीं, 
तेरी याद भी अब सज़ा सी लगी। 
जिसे समझा था अपना सब कुछ, 
उस श्ख़्स की बात दग़ा सी लगी
 
थक गयी हूँ तुझसे उलझ कर, 
अब सुकून चाहती हूँ ख़ुद में। 
जिस मोहब्बत में ख़ुद को खोया, 
अब तलाश है मुझे अपनी हद में। 
 
ना शिकवा है, ना ही गिला, 
बस एक सबक़ बन गया है तू। 
जिसे सोचा था इश्क़ की मंज़िल, 
वो रास्ता बन गया है तू। 
  
प्यार नहीं तुझसे अब—
क्योंकि अब ख़ुद से प्यार करना सीखा है। 

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