देशभक्ति
काव्य साहित्य | कविता प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति’1 Feb 2025 (अंक: 270, प्रथम, 2025 में प्रकाशित)
हमारा तन-मन मिट्टी का गुणगान करता है
यही वह भूमि जिस पर अभिमान करता है
जहाँ का हर बच्चा देश की सेवा करता है
माँ भारती के आँचल की रक्षा करता हैं
कभी भी हम भारतीय डरते नहीं मौत से
सिहर जाते दुश्मन सारे हमारे ख़ौफ़ से
तीन रंगीन कपड़ा नहीं ये हमारी शान है
लहराता हुआ तिरंगा हमारा स्वाभिमान है
नदियाँ, सागर, हिमालय हिन्द की जान है
गगन चूमता रंगों से रँगा अपना हिन्दुस्तान है
मेरा तुम्हारा सबका जीवन सफल हो जाए
देश पर मिट कर तिरंगे का कफ़न पा जाए
जीवन की ख़ुशनसीबी है देश के काम आना
जनता को चैन की साँस दे, वतन पर मिट जाना
शत-शत वंदन वीर तक़दीर में ये मुक़ाम आया
ख़ुशनसीब हुआ रक्त जो देश के काम आया।
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