नववर्ष: नव विहान
काव्य साहित्य | कविता डॉ. हंसराज1 Jan 2026 (अंक: 291, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
स्वागत है नववर्ष तुम्हारा, सन् 2026 की बेला है।
नव आशा की नई किरण है, उम्मीदों का मेला है॥
जो भूल हुई हम भूल गए, जो बीत गया वो क़िस्सा है।
अपने अनुभव से सीखे हम, संघर्ष पथिक का हिस्सा है॥
अरावली ने चोट सही और नदियों ने भी झेला है।
पर पक्षी से चहकें हम, अब वसन्त की बेला है॥
नकारात्मकता मिट जाए सब, हो उदित सूर्य उल्लास का।
कर्मठता के पथ पे चलकर, नव-सृजन करें इतिहास का॥
जीवन रखें योगमय, ना मन से हों बेचैन।
सदा स्वस्थ तन-मन रहे, बीते सुख की रैन॥
जिनके कारण हम बढ़े, मिला शिखर का मान।
उन गुरुओं को वन्दिये, रहे मात-पिता का ध्यान॥
आशाओं की नवल रश्मि और स्वप्नों की नई उड़ान हो।
मन की उमंगों से तरंगित, जीवन में नव विहान हो॥
चलो चलें नववर्ष मनाएँ, एक पौधा हर द्वार लगाएँ।
प्रकृति का शृंगार करें हम, धरती को ख़ुशहाल बनाऍं॥
ईश प्रार्थना करते हैं हम, ख़ुशहाली चहुँओर हो।
शान्ति, उन्नति और हरियाली, मंगलमय संसार हो॥
नववर्ष-2026 की बहुत-बहुत हार्दिक मंगलकामनाएँ . . .
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