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प्रकृति की गोद में

 

प्रकृति स्रोत है
जीवन का, 
ज़रिया है
बहुत कुछ सीखने का। 
दिवाकर का नियमित उदय
संदेश देता है—
हर अस्त के बाद
उदय आवश्यक है। 
 
मौसम बदलते हैं, 
ऋतुएँ परिवर्तित होती हैं—
यह बताने को
कि भीतर परिवर्तन
अनिवार्य है। 
 
नदी रुकती नहीं, 
बहती चली जाती है। 
सिखाती है—
ठहराव नहीं, 
गति ही जीवन है। 
 
हवा अदृश्य रहकर भी
यह एहसास दिलाती है
कि बिना प्रदर्शित किए
कभी-कभी
बहुत कुछ पाया जा सकता है। 
 
पेड़ की जड़ें
पूरा भार सँभाले हुए, 
स्वयं बढ़ते हुए भी
सबको थामे रहती हैं। 
 
प्रकृति की हर अनुभूति
हमें यही सिखाती है—
जीवन के हर रंग को पहचानना
और उसे जी लेना ही
सच्चा जीवन है। 

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