क़ुबूलनामा
शायरी | नज़्म अभिलाष गुप्ता15 Apr 2026 (अंक: 295, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
हालाँकि, कोई दावा-ए-पारसाई नहीं करता,
मेरा दुश्मन भी मेरी दिल से बुराई नहीं करता
जानता हूँ तमाम लोग, मुझे पसंद नहीं करते मगर,
मैं भी तो हर किसी से आशनाई नहीं करता . . .
सच है, अपनी पे आ जाऊँ तो किसी की नहीं सुनता
मगर, ख़राबतरीन हालात में भी बेअदबी, बेहयाई नहीं करता . . .
बहुत लोगों ने तोड़ा है आदतन यक़ीन मेरा,
फिर भी मैं जानकर किसी से बेवफ़ाई नहीं करता . . .
ख़ुशामदपसंद, इसलिए भी ख़फ़ा रहते हैं मुझसे,
मैं उनकी शान में क़सीदे नहीं पढ़ता, उनकी बड़ाई नहीं करता . . .
मेरे अज़ीज़, इसलिए भी फ़िदा रहते हैं मुझपर,
मैं उनकी ख़ामियाँ, उनके राज़, दिल में रखता हूँ, दुनियाभर में रुसवाई नहीं करता . . .
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
नज़्म
कविता
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं