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तेरी-मेरी प्रीति में


(दोहा छंद आधारित गीत)
 
आज तुम्हारे गाल पर, मल दूँ रंग-गुलाल। 
तेरी-मेरी प्रीति में, आए तनिक उबाल। 
 
रँग फागुन के रंग में, प्रकृति रचाए रास। 
आते गुन-गुन कर भ्रमर, महक रहा मधुमास। 
हो लें मस्त मलंग हम, पीकर थोड़ी भाँग। 
बीत गई जो यामिनी, कुक्कुट देगा बाँग। 
 
मौन-निमंत्रण पा प्रिये!, बदलो अपनी चाल। 
तेरी-मेरी प्रीति में, आए तनिक उबाल। 
 
सोए जो जज़्बात हैं, उन्हें जगाना मीत। 
छौंक लगाकर प्रेम का, लेना मन को जीत। 
दहके हृदय वियोग में, जैसे पुष्प-पलास। 
प्रेम-पुजारी का यहाँ, उड़ता नित उपहास। 
 
हृदय-धरा से दो प्रिये!, डर को आज निकाल। 
तेरी-मेरी प्रीति में, आए तनिक उबाल। 
 
ओढ़ चुनरिया प्यार की, कर सोलह-शृंगार। 
आओ मेरे अंक में, दूँगा जीवन वार। 
सदियों तक क़ायम रहे, अपना पावन-प्यार। 
प्रणय-निवेदन को प्रिये! अब कर लो स्वीकार। 
 
प्रियवर! मेरी ताल के, संग मिलाओ ताल। 
तेरी-मेरी प्रीति में, आए तनिक उबाल। 

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