वन्दे मातरम्
काव्य साहित्य | कविता नन्दकुमार मिश्र आदित्य15 Aug 2025 (अंक: 282, प्रथम, 2025 में प्रकाशित)
अलंकार रस छंद रागिनी विद्या विनय विवेक दायिनी!
ऊर्जा स्फूर्ति तेज वरदात्रि नमन तुम्हें माँ हँस वाहिनी!
वन्दे मातरम्
ऊर्जामय राष्ट्रभावभूषित वरेण्य सविता
जनचेतना संवाहिका सारस्वत विधा कविता
निज भाषा मातृभूमि प्रणति वसुधा कुटुम्ब
भावना परिष्कार जगाये राष्ट्र अस्मिता
राष्ट्रभक्ति स्वाभिमान संजीवनी ऊर्जा हेतु
सुलभ स्वाभाविक संचार वन्दे मातरम्
मानसिक आघात से निजात की जो बात हो
एकमात्र मानें उपचार वन्दे मातरम्
भाल भारतमाता के हिन्दी की बिन्दी हो
अहर्निश हिन्दी त्योहार वन्दे मातरम्
कब तक संपर्क संचार अथवा राजभाषा
कहने का चलेगा व्यापार वन्दे मातरम्
हिन्दी निर्विकल्प राष्ट्रभाषा उद्घोषित
राष्ट्रहित इसका व्यवहार वन्दे मातरम्
शब्द इंडिया निरस्त संविधान-सीमा से
तब तो भारत हो साकार वन्दे मातरम्
कौटुम्बिक भाषा बने वसुधा की हिन्दी अपनी
यह तो जनमानस का सुविचार वन्दे मातरम्
कापुरुष क्लीव का मलिन मुखमंडल हो
भारतीय गरिमा का आधार वन्दे मातरम्
हिन्दी-दिवस नहीं हिन्दी-युग, हिन्दी हो आकल्प
आत्मचेतना जग जाये जब मन में हो संकल्प
जय हिन्दी जय हिन्द जयति जय
हम हिन्दी अपनायें निर्भय
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