अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

वरदान

क्या है ये???
ये भीगी आँखों में 
मुस्कान दे रहा है...
सुप्त हुए जज़्बात को
उड़ान दे रहा है....
प्रफुल्लित है हृदय 
और वज़ह भी नहीं कोई ...
ये क्या है जो क्षितिज से परे 
आवाज़ दे रहा है।

 

क्या है ये???
ये सागर की लहरों को 
उनवान दे रहा है ...
ये पौ फटते वक़्त सी 
अज़ान दे रहा है...
जैसे आस-पास बिखरी हो
निर्मल धूप- सी कोई ...
ये क्या है जो खंडहर को 
नव-निर्माण दे रहा है।

 

क्या है ये???
ये अधीर हृदय को मेरे
मुरली तान दे रहा है ....
निष्प्राण हुई मछली में 
फिर प्राण दे रहा है ...
जैसे दूर घाटियों में 
गूँजती हों घंटियाँ....
सब त्याग दो दुविधाएँ
आह्वान दे रहा है।

 

क्या है ये???
ये थरथराती प्रत्यंचा को 
कमान दे रहा है ...
भटके हुए पथिक को राह 
आसान दे रहा है ...
जैसे आ रहें हो झुंड 
बादलों के झूम के...
सूखे सहरा में बारिश का 
सामान दे रहा है।

 

क्या है ये???
क्या अलौकिक प्रकाश पुंज 
प्रभु वरदान है ये???
जो ख़ुद में ख़ुद को पहचानने का
पूत दान दे रहा है 
मेरी हर भटकती भावना को 
शब्द-ज्ञान दे रहा है...
हाँ ये अलौकिक प्रकाश पुंज 
प्रभु वरदान दे रहा है ।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं