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मृगतृष्णा

प्रिय-वियोग के पतझर में- 
जीवन-वृक्ष से निरंतर 
पत्तों-सी झरती रही 
आशा और प्रतीक्षा 
प्रेम-वसंत की मृगतृष्णा में।
 

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