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ओ डॉक्टर!


(वैश्विक महामारी के कठिन दौर में डॉक्टर्स की भूमिका को समर्पित) 
 
धरती पर ईश्वर का रूप है डॉक्टर! 
बेबस आँखों की उम्मीद भी डॉक्टर! 
जब धड़क रहा हो डर से दिल, 
तुम हाथ थाम लेते अक़्सर! 
 
तुम अपनी मेहनत के बल पर, 
जीवन बचा ले आते हो! 
जब टूट रही जीवन रेखा, 
तुम बीच बाँध बन जाते हो! 
 
कितनों की ख़ुशियों के दाता, 
कितने मर्ज़ों के उपचार बने! 
हे डॉक्टर तुम्हें प्रणाम मेरा, 
तुम जीवन रक्षक उपहार बने! 
 
अपनी फ़िक्रों को भुलाकर आप, 
दूसरों को बेफ़िक्र कर जाते हो! 
कभी अपने हिस्से की ख़ुशियाँ, 
परमार्थ हित दे जाते हो! 
 
ज्ञान की ज्योति का प्रकाश, 
तुमने सच में फैलाया है! 
उम्मीद छोड़ चुकों को भी, 
आशा देकर अपनाया है! 
 
हम रब को देख नहीं सकते, 
बस अनुभव कर पाते हैं! 
लेकिन तुम में ही रब बसता, 
यह सच में जान अब पाते हैं! 
 
हम सब की दुआएँ तुम्हें लगें, 
तुम परोपकार करते जाना! 
टूटे जीवन की कड़ियों को, 
तुम बाँध सखा बढ़ते जाना॥

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