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वो सपने गुज़र गए

 

सपने ज़रूरी हैं ख़ुद को बहलाने को! 
सपने ज़रूरी हैं इनसे प्रेरणा पाने को! 
सपनों की दुनियाँ अपनी सल्तनत सी! 
वाज़िब हैं सपने नाउम्मीदी मिटाने को। 
 
सपनों को देखना लाज़िमी अपने लिए! 
दिन की थकन से लोरियों सी नींद लिए! 
सपनों से जुनून-हिम्मत मिले मेहनत की! 
कुंजी है स्वर्णिम भविष्य की दिशा लिए। 
 
सपने ज़रूरी नहीं पूरे हों सभी के सभी! 
अधूरे तो क्या हुआ सपने हक़ीक़त नहीं! 
टूट गए सपने कि उन पर अफ़सोस क्या! 
नए सपने देखने को उम्र न थमी है कभी। 
 
जो गुज़र गए उनमें मर्ज़ी प्रभु की है! 
यहीं समझ कर ख़ुश रहो हर हाल में! 
सपने सच हों ऐसी कोशिश करते रहें! 
काश व किन्तु का मलाल न हो बाद में॥

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