रिश्ते . . .
काव्य साहित्य | कविता नेहा शुक्ल बर्रेत्तो1 Sep 2025 (अंक: 283, प्रथम, 2025 में प्रकाशित)
कहते हैं रिश्ते पानी की तरह होते हैं,
समय के साथ बह जायेंगे
बाँध लो गर किनारों को तो
आख़िर तक साथ निभाएँगे
बदल कर रूप अनेक
मंज़र कई दिखलायेंगे
क़दम क़दम पर कभी कभी
यह एहसास भी कराएँगे
हम हैं तो तुम हो, भूलना नहीं
क़द्र न की तो पल में रूठ जायेंगे
दिन रात एक कर सींचे जो पौधे,
पलक झपकते ही मुरझा जायेंगे
रिश्ते वाक़ई पानी की तरह होते हैं,
समय के साथ बह जायेंगे
पर बाँध लो किनारों को तो
आख़िर तक साथ निभाएँगे।
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