अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

बेटी की शादी

रमानाथ ने जैसे ही मंडप में प्रवेश किया वैसे ही अलोक से पूछा, "आलोक जी! जहाँ तक मुझे पता है कैलाशजी का एक ही लड़का था – रमन.. जिस की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी थी।"

"हाँ तो?"

"फिर ये शादी किस की है?"

"उन की लड़की की।" आलोक ने कहा तो रमानाथ अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पाए,

"मगर उन के तो एक ही लड़का था जिस की शादी हो चुकी थी। उन की और कोई लड़की नहीं थी। फिर यह किस की शादी है?"

"उसी विधवा लड़की की।"

"क्या?" रमानाथ जी चौंक उठे, "विधवा बहू की?"

"नहीं, विधवा बेटी की। आप ने पत्रिका नहीं देखी है क्या?"

रमानाथ क्या जवाब देते। वे भी शादी के दौरान कभी कैलाश जी को देख रहे थे तो कभी उस विधवा बेटी को।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अँधेरा
|

डॉक्टर की पर्ची दुकानदार को थमा कर भी चच्ची…

अंजुम जी
|

अवसाद कब किसे, क्यों, किस वज़ह से अपना शिकार…

अंडा
|

मिश्रा जी अभी तक'ब्राह्मणत्व' का…

अंधविश्वास
|

प्रत्येक दिन किसी न किसी व्यक्ति की मौत…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

पुस्तक समीक्षा

बात-चीत

लघुकथा

बाल साहित्य कहानी

कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं