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प्रेम-लगन

मधुर स्मृति, तुम्हारी सजन
बीती रात का सुखद मिलन
शीतल जल, लगाए अगन


तुम्हारी गंध भरी पवन
भर अंक में हो प्रेम मगन
उष्ण श्वासों की सरगम
गुंजित अभी तक अन्तर्मन


प्रेम विह्वल हो मेरा मन
ढूँढे तुम्हें मदमाता यौवन
बस एक लगन बस एक लगन
प्रिय भोगूँ फिर तुम्हारी छुअन


मधुर स्मृति, तुम्हारी सजन
बीती रात का सुखद मिलन
शीतल जल, लगाए अगन
 

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