सत्यवान साहब, भूतपूर्व सैनिक
ज़िला: गाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश
लेखक की कृतियाँ
ग़ज़ल
- अकेले मिलेगा कहाँ चाँद फिर से
- उलझी हुई हम अपनी कहानी से भी आगे
- उसकी महफ़िल में मेरी बात कर ऐ सन्नाटा
- चाह मिलने की जागी सनम है
- जिनकी हर एक दलीलों पे फ़िदा होते रहे
- जुदा भी हों तो किसी से कोई ख़फ़ा न लगे
- जो यूँ नाज़-ए-उल्फ़त में खोते फिरोगे
- झिलमिलाती जो झरोखों से वहीं झिलमिल हो तुम
- ठहरे न मगर वक़्त, धुरी की तरह क्यूँ है
- तेरी ज़ुल्फ़ पर रात बीमार होगी
- दिल को मेरे नाम ज़रा करके देखो
- दिल ने समझा तुझे ही हल शायद
- बन के माँझी कोई पतवार लिए बैठा है
- मेरे जाने के भी क़िस्सों से महक आएगी
- रोकने को तो खड़ा पूरा ज़माना होगा
- वक़्त से आर-पार करता हूँ
- हम फ़क़त आइना दिखाते हैं
- हुस्न वालों से खुले-आम हवा दिल्ली की
नज़्म
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं