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एक पेड़ की गवाही

 

यदि कभी
इस गाँव का इतिहास लिखा जाए,
तो मुझे गवाह के रूप में बुलाया जाना चाहिए।
मैं यहाँ
तुम सबसे पहले आया था।
जब यह सड़क नहीं थी,
जब ये घर नहीं थे,
जब इस जगह का कोई नाम भी नहीं था,
मैं तब भी यहीं खड़ा था।
मैंने पहली बार
एक आदमी को मिट्टी में बीज दबाते देखा।
उसकी हथेलियों में
भविष्य की गंध थी।
मैंने एक लड़की को
अपने नाम का पहला अक्षर
मेरी छाल पर उकेरते देखा।
वह अब इस दुनिया में नहीं है।
लेकिन उसका अक्षर
अब भी मेरे भीतर बढ़ रहा है।
मैंने प्रेम देखे हैं।
इतने कि गिन नहीं सकता।
दो लोग
मेरी छाया में बैठते,
और सोचते
कि दुनिया उनके विरुद्ध है।
फिर कुछ वर्षों बाद
वे अपने बच्चों के साथ लौटते।
और कभी-कभी
वे लौटते ही नहीं।
मैंने युद्ध नहीं देखे,
लेकिन मैंने मनुष्यों को
अपने ही लोगों से लड़ते देखा है।
मैंने खेतों को सूखते देखा।
नदियों को सिकुड़ते देखा।
और उन आँखों को भी,
जो हर वर्ष
आकाश की ओर देखकर पूछती थीं—
“इस बार बारिश आएगी न?”
मैंने मृत्यु को
इतनी बार देखा है
कि अब वह मुझे चौंकाती नहीं।
मैंने छोटे बच्चों को
बूढ़ा होते देखा।
और बूढ़ों को
मिट्टी में लौटते।
मैंने सीखा—
मनुष्य मृत्यु से नहीं डरता।
वह भुला दिए जाने से डरता है।
इसीलिए
वे अपने नाम पत्थरों पर लिखते हैं।
दीवारों पर लिखते हैं।
किताबों में लिखते हैं।
और कभी-कभी
मेरी छाल पर भी।
लेकिन मैं जानता हूँ—
नाम नहीं टिकते।
कहानियाँ टिकती हैं।
एक दिन
कुछ लोग आए।
उन्होंने मेरी शाखाओं को देखा।
मेरी ऊँचाई नापी।
और तय किया
कि यहाँ एक नई इमारत बनेगी।
मैंने विरोध नहीं किया।
पेड़ों को
अपनी भाषा में विरोध करना नहीं आता।
मैं केवल हवा में हिला।
जैसे कोई बूढ़ा आदमी
अंतिम बार सिर हिलाता है।
कल शायद
मैं यहाँ न रहूँ।
मेरी लकड़ी
किसी मेज़ में बदल जाए।
किसी दरवाज़े में।
किसी चिता में।
लेकिन इससे क्या फ़र्क पड़ता है?
मैंने अपना काम कर दिया है।
मैंने छाया दी।
मैंने पक्षियों को घर दिया।
मैंने प्रेमियों को एकांत दिया।
मैंने थके हुए लोगों को
थोड़ी देर बैठने की जगह दी।
और सबसे बढ़कर—
मैंने याद रखा।
जब मनुष्य भूल गए,
मैंने याद रखा।
किसने किससे प्रेम किया।
किसने किसे खोया।
किसने किस दिन रोया।
और किसने
अपने जीवन का सबसे सुंदर सपना
मेरी छाया में देखा।
यदि कभी
इस पृथ्वी पर
सच बोलने की बारी आए,
तो मनुष्यों से पहले
पेड़ों को बुलाना।
वे सबसे लंबे समय तक जीवित रहते हैं।
और सबसे कम झूठ बोलते हैं।

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