आनंद त्रिपाठी ‘आतुर’–क्षणिकाएँ– बेटी
काव्य साहित्य | कविता - क्षणिका आनंद त्रिपाठी ‘आतुर’1 Jun 2024 (अंक: 254, प्रथम, 2024 में प्रकाशित)
1.
पिता की पगड़ी लाज हैं, माता का अभिमान
इसीलिए हो हर जगह बेटी का सम्मान॥
2.
बेटी घर की लक्ष्मी रौनक़ हैं सुख शान्ति
इनके रहते सबके चेहरे में रहती एक कांति॥
3.
भाई की ताक़त हैं माँ का फ़र्ज़ अदा करती हैं
लड़कियाँ सबके परवरिश में तैयार सदा रहती हैं॥
4.
लड़कियाँ प्रेम की डोर ममता की कड़ी हैं
क़दम से क़दम मिला कर सरहद पर भी खड़ी हैं॥
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