आनंद त्रिपाठी ‘आतुर’ – मुक्तक 003
काव्य साहित्य | कविता-मुक्तक आनंद त्रिपाठी ‘आतुर’15 May 2024 (अंक: 253, द्वितीय, 2024 में प्रकाशित)
मिर्ज़ा ग़ालिब मीर की ग़ज़ल नहीं होने वाले
दिल दरिया है पर आँख का काजल नहीं होने वाले
जितने दिन साथ हूँ पढ़ लो किताबों की तरह मुझको
चल दिये छोड़ तुमको तो प्रश्न ये हल नहीं होने वाले॥
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