डॉ. अम्बेडकर
काव्य साहित्य | कविता उमेन्द्र निराला1 May 2026 (अंक: 296, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
आग लगी थी जातिवाद की,
छुआछूत का विषपान किया।
अपमानों को गले लगाकर,
संघर्षों का आह्वान किया।
पुण्य धरा महू की शान हैं,
देश के रत्न अम्बेडकर महान हैं।
सहे अत्याचार वर्षों तक,
पीड़ा का यह परिणाम है।
वर्षों की तपस्या, संघर्षों की,
गूँजता हुआ हुंकार है।
रामजी-भीमाबाई की संतान हैं,
देश के रत्न अम्बेडकर महान हैं।
सामाजिक परिवर्तन लाने को,
शिक्षा, संगठन, संघर्ष का संदेश दिया।
दलित, शोषित, वंचित, पिछड़ों को,
मुख्यधारा में आने का अधिकार दिया।
बाबा साहेब जिनका नाम है,
देश के रत्न अम्बेडकर महान हैं।
महिला अधिकार दिलाने को,
प्राचीन विधान का विरोध किया।
देश की प्रगति में भागीदारी हो,
हिंदू कोड बिल का प्रावधान किया।
हम सबकी ताक़त और सम्मान हैं,
देश के रत्न अम्बेडकर महान हैं।
देश को सुदृढ़, सशक्त बनाने को,
संविधान लिख सूत्राधार किया।
समानता, स्वतंत्रता, न्याय से,
जन-जन का उत्थान किया।
संविधान जिनकी पहचान है,
देश के रत्न अम्बेडकर महान हैं।
हिंदू धर्म का त्याग कर,
बौद्ध धर्म स्वीकार किया।
समरसता का मार्ग दिखाकर,
अनुयायियों का उद्धार किया।
गौतम बुद्ध के नवयान हैं,
देश के रत्न अम्बेडकर महान हैं।
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टिप्पणियाँ
Vivek Kumar 2026/04/23 09:15 PM
Amazing poem.
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SHANI BHARTI 2026/04/24 04:02 PM
Samaj aur baba sahab ka jiwan ka sampurn vardan jai bhim.