सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’ हरियाणा के जिला करनाल से संबंध रखने वाले हिंदी एवं हरियाणवी साहित्यकार हैं। वे कविता, लघुकविता एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेखन के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएँ, जीवनानुभव और सरल लेकिन प्रभावशाली अभिव्यक्ति प्रमुख रूप से दिखाई देती है।
लेखक की कृतियाँ
कविता
- अंतिम चिट्ठी
- अंतिम प्रश्न
- आदमी की तलाश
- आदमी के भीतर
- उत्तराधिकारी
- एक अच्छा मनुष्य
- करुणा
- करुणा का घर
- गाँव की शाम
- गाँव जो अब भी बसता है
- जीवन
- दीपक
- नदी
- नदी का धर्म
- पृथ्वी
- पृथ्वी की चुप्पी
- पृथ्वी की थकान
- प्रमाण
- बूढ़ा पेड़
- बूढ़ा पेड़
- भविष्य के नाम
- भारत विभाजन और मानवीय दर्द
- मन की खिड़की
- मनुष्य का घर
- मनुष्य होने का अर्थ
- माँ की अलमारी
- मौन
- मौन - 1
- युद्ध के बाद
- रोटी और सपने
- शहर में अकेला आदमी
- सभ्यता
- समय का पेड़
- समय की धूल
- समय के सामने
- स्मृतियाँ
- स्मृतियों का उजाला
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं