स्मृतियाँ
काव्य साहित्य | कविता सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’15 Jun 2026 (अंक: 299, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
कुछ स्मृतियाँ
पुरानी किताबों की तरह होती हैं।
जितना उन्हें खोलो,
उतनी ही
सुगंध आती है।
और हर पन्ने पर
एक बीता हुआ जीवन
मुस्कुराता मिलता है।
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