पृथ्वी
काव्य साहित्य | कविता सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’15 Jun 2026 (अंक: 299, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
पृथ्वी
सबकी माँ है।
वह किसी से
भेदभाव नहीं करती।
अन्न उगाती है,
जल देती है,
छाँव देती है।
फिर भी
मनुष्य उसे
सबसे कम समझता है।
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