मौन
काव्य साहित्य | कविता सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’15 Jun 2026 (अंक: 299, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
मौन
ख़ालीपन नहीं होता।
उसमें भी
अनगिनत शब्द रहते हैं।
कई बार
जो बात
घंटों की बातचीत नहीं कह पाती,
उसे एक मौन क्षण
कह देता है।
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
कविता
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं