स्मृतियों का उजाला
काव्य साहित्य | कविता सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’15 Sep 2026 (अंक: 302, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
कुछ स्मृतियाँ
दीपक की तरह होती हैं।
वे वर्षों बाद भी
मन के किसी कोने में
जलती रहती हैं।
जब वर्तमान का अँधेरा
बहुत घना हो जाता है,
तब वही स्मृतियाँ
रास्ता दिखाती हैं।
मनुष्य
केवल भविष्य से नहीं,
अपनी यादों से भी जीवित रहता है।
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