आदमी प्यार में सोचता कुछ नहीं
शायरी | ग़ज़ल कु. सुरेश सांगवान 'सरू’15 Sep 2019
आदमी प्यार में सोचता कुछ नहीं
किस घड़ी मात होगी पता कुछ नहीं
आज पछता रही हूँ इसी बात पर
दोस्तों से लिया मशवरा कुछ नहीं
मुश्किलें हल हुई हैं न होंगी कभी
ज़िंदगी से बड़ा मसअला कुछ नहीं
हो रही हर तरफ़ ज्ञान की बारिशें
बारिशों में मगर भीगता कुछ नहीं
हम हमेशा रहे आमने सामने
दरमियाँ आज भी राब्ता कुछ नहीं
खींच ली है ज़बाँ क्या किसी ने ए दिल
आजकल बोलता पूछता कुछ नहीं
जो मिला है उसी में ख़ुशी ढूँढ ली
ज़िंदगी से रहा अब गिला कुछ नहीं
गर इबादत करो तो उसी की करो
इस ज़मीं पर ख़ुदा से बड़ा कुछ नहीं
कुछ हदें हैं तिरी कुछ मिरी भी रहीं
प्यार है आज भी फ़ासला कुछ नहीं
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टिप्पणियाँ
Surender singh 2019/09/16 03:49 PM
Bahut khoob ,shaandaar peshkash ke liye aapko bahut bahut Badhai. likhti rahen.
Narender Gahlawat 2019/09/12 04:08 AM
Meari kahani likh diii
Indu verma 2019/09/11 11:43 PM
बहुत खूब लिखा सरू
Akshaya 2019/09/11 06:08 PM
Very nice
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Very nice