मोक्ष का रहस्य
काव्य साहित्य | कविता नवल किशोर कुमार3 May 2012
पूछा मैंने एक दिन
एक दिव्य आत्मा से,
क्या है जीवन-मरण,
मोक्ष का रहस्य तो बतलाओ।
दिन बीतता है और,
जैसे रात भी कट जाती है,
ठीक वैसे ही तो,
मृत्यु के बाद,
ज़िन्दगी भी खत्म हो जाती है,
कहाँ है, कौन है हमारी आत्मा,
इसका जरा पहेली तो सुलझाओ।
देखा है मैंने भी असंख्य,
बेजान बेधर्म आत्माओं को,
क्या आत्मा भी पाखंड है,
इसकी वैधता का कारण तो बतलाओ।
ना जाने कितनी बार,
इस निज आत्मा का,
बेरहमी से क़त्ल किया मैंने,
हर बार इसके पुर्नजीवित होने का
बंधु कोई कारण तो बतलाओ।
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