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मर्द

2122      2122      2122
 
मर्द क्या हैं हाल उसका कौन जाने
फ़र्ज़ कितने वो निभाता कौन जाने
 
ख़्वाहिशों को मार देता है अंदर ही 
दर्द कितना वो छुपाता कौन जाने 
 
बोझ कांधों पे उठा कर घूमता है 
ज़ख़्म अपना वो छुपाता कौन जाने
 
उम्र भर बस काम ही वो यूँ करेगा 
आर्ज़ुओं को वो दबाता कौन जाने

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