हम ही हैं, भारत के मतदाता
काव्य साहित्य | कविता वेद भूषण त्रिपाठी1 Feb 2026 (अंक: 293, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
(राष्ट्रीय मतदाता दिवस)
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
जनजीवन का भाग्य बदलते
हम ही हैं, भाग्य विधाता।
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
जन-जन को जागृत करके
मानवीय कल्याण कराएँ।
स्नेह भाव से मतदेय-स्थल
मतदान करने जाएँ।
अंतरात्मा की आवाज़ को
भूल से भी न बिसराएँ।
दबाव, प्रलोभन, दुर्भाव में
मताधिकार न अपनाएँ।
जाति-धर्म संप्रदाय से ऊपर उठकर
मताधिकार अपनाएँ।
शत-प्रतिशत मतदान कराकर
राष्ट्र का मान बढ़ाएँ।
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
जनजीवन का भाग्य बदलते
हम ही हैं, भाग्य विधाता।
हम भारत हैं।
हम ही हैं, भारत के मतदाता॥
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