एक पेड़ हरिद्वार के नाम
काव्य साहित्य | कविता वेद भूषण त्रिपाठी1 Jun 2026 (अंक: 298, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
आओ जन-जन स्नेह भाव से
संकल्पित हो जाएँ।
एक पेड़ हरिद्वार के नाम
मिलकर सभी लगाएँ।
धरती शस्य-श्यामला बनाकर
प्रकृति-सौंदर्य बढ़ाएँ।
देव-भूमि की पावनता का
वैश्विक मान बढ़ाएँ।
हरिद्वार कुंभ की सर्वभौमिकता
मंगलमयी बनाएँ।
मायापुरी ब्रह्मकुंड की महिमा का
शुभ संदेश फैलाएँ।
हरे-भरे प्रफुल्लित वृक्षों को
वृक्ष-पातन से सदा बचाएँ।
रौद्र-रूप संदेश प्रकृति का
भूलकर भी न बिसराएँ।
गोमुख से गंगा सागर तक
गंगा निर्मल, स्वच्छ बनाएँ।
श्रद्धानत हो देव-पूजिता के
चरण-कमल में शीश झुकाएँ।
अमृत-जल से अभिसिंचित कर
सुख-मंगल वर्षाएँ।
गंगा माँ के पावन तट पर
मंगलदीप जलाएँ।
आओ जन-जन स्नेह भाव से
संकल्पित हो जाएँ।
एक पेड़ हरिद्वार के नाम
मिलकर सभी लगाएँ।
धरती शस्य-श्यामला बनाकर
प्रकृति-सौंदर्य बढ़ाएँ।
देव-भूमि की पावनता का
वैश्विक मान बढ़ाएँ।
हरिद्वार कुंभ की सर्वभौमिकता
मंगलमयी बनाएँ।
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