ख़ुश्बू
शायरी | नज़्म संजय श्रीवास्तव15 Jan 2026 (अंक: 292, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
तेरे इश्क़ बिन ये ज़िन्दगी नहीं
तेरे प्यार बिन ये बंदगी नहीं।
तू हँसे तो बहारें जायें मचल
जो उदास हो तो ये रंग नहीं।
तू है, तो रंगीन जहाँ है मेरा,
तू जो रूठ जाये तो नूर नहीं।
तेरी याद है तो है जीवन मेरा,
बिन याद के मेरा वुजूद नहीं।
तेरा हसीन चेहरा है सुकून मेरा
हो ग़म तो मुझको चैन नहीं।
तेरी चाहत बनी है मेरी ज़िन्दगी
तेरे प्रेम बिन मेरी तक़दीर नहीं।
तेरी ख़ुशी से गुलशन महके मेरा,
जो हो रंज तो इसमें ख़ुश्बू नहीं।
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