मैं हार कर नहीं लिख रहा
काव्य साहित्य | कविता अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श’15 Jan 2026 (अंक: 292, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
मैं हार कर नहीं लिख रहा।
मैं इसलिए लिख रहा हूँ
क्योंकि कुछ नाम
आवाज़ माँगते हैं,
और कुछ चेहरे
ख़ामोशी।
मैं इसलिए लिख रहा हूँ
ताकि जो चला गया
वो अफ़वाह न बन जाए,
और जो बचा है
वो शर्मिंदा न हो।
मैं लिखता हूँ
ताकि वक़्त के हाथ
इतने लंबे न हो जाएँ
कि वो स्मृतियों को
घसीट कर ले जाएँ।
मैं हार कर नहीं लिख रहा।
मैं लिख रहा हूँ
क्योंकि लिखते हुए
मैं झुकता नहीं,
मैं समेट लेता हूँ।
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