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इकाई भी दहाई भी

 

1222   1222
 
इकाई भी दहाई भी। 
नगर में हो सफ़ाई भी॥
 
नदी है और पर्वत हैं, 
मुहाने हैं तराई भी। 
 
उन्होंने है ग़ज़ल गाई, 
पढ़ी है औ रुबाई भी। 
 
बुरा होने लगे गर तब, 
जहाँ में हो भलाई भी। 
 
दिवस यदि शुभ हुआ है तो, 
हमारी लें बधाई भी। 
 
हँसी का यदि ख़ज़ाना है, 
मगर आती रुलाई भी। 
 
मुसलमाँ हैं सनातन हैं, 
तथागत हैं इसाई भी। 
 

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