भौचक सी दुनिया
काव्य साहित्य | गीत-नवगीत अविनाश ब्यौहार15 Mar 2023 (अंक: 225, द्वितीय, 2023 में प्रकाशित)
इलाज कैसे हो जब
पेट छुपाना दाई से।
है भौचक सी दुनिया
अब केवल महँगाई से॥
उठ रहे सागर में
ज्वार-भाटे हैं।
उजड़े-उजड़े दिन
हमने काटे हैं॥
ख़ौफ़ खा रही होगी
ख़ूबसूरती झाँई से।
आम की बौरों को
काठ मार गया।
आधुनिकता का है
ठाठ मार गया॥
आदमी को डर लगता
आजकल परछाँई से।
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