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छिनाल

 

उस समाज में लड़कियों को नौकरी करने की इजाज़त नहीं थी क्योंकि समाज में लिंगभेद और लिंग असमानता जैसी बुराइयांँ व्याप्त थीं। समाज संकीर्ण सोच और कुरीतियों से ग्रसित था। 

उसके पिता का देहांत हो गया था। घर में बूढ़ी मांँ और दो भाई थे। कमाने वाला कोई नहीं था। समाज के भय से वह नौकरी नहीं कर पा रही थी। और घर में भुखमरी डेरा डालने वाली थी। वह घर को देखती तो रह-रह कर कांँप जाती थी। 

उसने समाज से विद्रोह करने का फ़ैसला कर लिया और एक सरकारी कार्यालय में नौकरी कर ली। वह चरित्र के प्रति पूर्ण सजग थी। वह समय पर ऑफ़िस जाती और समय पर घर वापस लौटती। वह पूरे घर का सहारा बन गई थी। उसका जो परिवार के प्रति दायित्व तथा उसने वह सम्हाल लिया था। 

समाज को यह क़तई मंज़ूर नहीं था इसलिए समाज के लोग उसे छिनाल समझने लगे थे। 

यह तो भारतीय समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। लगता है ऐसे समाज में भोर का सूरज अभी उगा नहीं। 

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