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रेल चली

आओ सारे बच्चो आओ
एक-एककर सब जुड़ जाओ।
अब देखो अपनी रेल चली 
यह रेल चली है गली-गली॥   
     
रघुबीर बना इसका इंजन
बन गया गार्ड है कमलनयन।
नदियाँ-नाले–मैदान हरे
सब गाँव-शहर यह पार करे॥

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