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चराग़े-दिल

हमने चाहा था क्या और क्या दे गई

हमने चाहा था क्या और क्या दे गई
ग़म का पैग़ाम बादे-सबा दे गई।

मुस्कराहट को होटों से दाबे रक्खा
मेरी नीची नज़र ही दग़ा दे गई।

मौत से कम नहीं तेरी चाहत, के जो
जीते रहने की हमको सज़ा दे गई।

आके इक मौज हल्की सी साहिल पे आज
आना वाला है तूफाँ पता दे गई।

हम झुलसते रहे हिज्र की आग में
ज़िंदगी मुझको देवी सज़ा दे गई।

पुस्तक की विषय सूची

  1. अहसास की रोशनी- 'चराग़े‍-दिल' : समीक्षकः मा.ना.नरहरि
  2. चराग़े-दिल - कुछ विचार
  3. कविता क्या है? : देवी नागरानी
  4. कितने पिये हैं दर्द के, आँसू बताऊँ क्या
  5. दीवारो-दर थे, छत थी वो अच्छा मकान था
  6. देखकर मौसमों के असर रो दिये
  7. उड़ गए बालो-पर उड़ानों में
  8. आँधियों के भी पर कतरते हैं
  9. ताज़गी कुछ नहीं हवाओं में
  10. या बहारों का ही ये मौसम नहीं
  11. डर उसे फिर न रात का होगा
  12. बारिशों में बहुत नहाए हैं
  13. लबों पर गिले यूँ भी आते रहे हैं
  14. तारों का नूर लेकर ये रात ढल रही है
  15. अपने जवान हुस्न का सदक़ा उतार दे
  16. बाक़ी न तेरी याद की परछाइयाँ रहीं
  17. सपने कभी आँखों में बसाए नहीं हमने
  18. कैसे दावा करूँ मैं
  19. झूठ सच के बयान में रक्खा
  20. तू न था कोई और था फिर भी
  21. गर्दिशों ने बहुत सताया है
  22. दर्द बनकर समा गया दिल में
  23. छीन ली मुझसे मौसम ने आज़ादियाँ
  24. चराग़ों ने अपने ही घर को जलाया
  25. हिज्र में उसके जल रहे जैसे
  26. तेरे क़दमों में मेरा सजदा है
  27. दिल को हम कब उदास रखते हैं
  28. ख़्यालों ख़्वाब में ही महफिलें सजाता है
  29. हमने चाहा था क्या और क्या दे गई
  30. चोट ताज़ा कभी जो खाते हैं
  31. वो अदा प्यार भरी याद मुझे है अब तक
  32. ठहराव ज़िंदगी में दुबारा नहीं मिला
  33. जाने क्या कुछ हुई ख़ता मुझसे
  34. अँधेरी गली में मेरा घर
  35. ये सायबां है जहां, मुझको सर छुपाने दो
  36. ख़ता अब बनी है सज़ा का फ़साना
  37. बहता रहा जो दर्द का सैलाब था न कम
  38. बुझे दीप को जो जलाती रही है
  39. कोई षडयंत्र रच रहा है क्या
  40. तर्क कर के दोस्ती फिरता है क्यों
  41. कितने आफ़ात से लड़ी हूँ मैं
  42. यूँ उसकी बेवफ़ाई का मुझको गिला न था
  43. रिश्ता तो सब ही जताते हैं
  44. बहारों का आया है मौसम सुहाना
  45. राज़ दिल में छिपाए है वो किस कदर
  46. नहीं उसने हरगिज रज़ा रब की पाई
  47. दीवार दर तो ठीक थे, बीमार दिल वहाँ
  48. हक़ीक़त में हमदर्द है वो हमारा
  49. सोच को मेरी नई वो इक रवानी दे गया
  50. सोच की चट्टान पर बैठी रही
  51. है गर्दिश में क़िस्मत का अब भी सितारा
  52. ज़िंदगी है ये, ऐ बेख़बर
  53. यूँ मिलके वो गया है कि मेहमान था कोई
  54. बददुआओं का है ये असर
  55. शबनमी होंठ ने छुआ जैसे
  56. दिल अकेला कहाँ रहा होगा
  57. मजबूरियों में भीगता, हर आदमी यहाँ
  58. वो नींद में आना भूल गए
  59. इक नश्शा-सा बेख़ुदी में हो
  60. मिट्टी का मेरा घर अभी पूरा बना नहीं
  61. वैसे तो अपने बीच नहीं है कोई ख़ुदा
  62. गुफ़्तगू हमसे वो करे जैसे
  63. राहत न मेरा साथ निभाए तो क्या करूँ?
  64. छोड़ आसानियाँ गईं
  65. शम्अ की लौ पे जल रहा है वो
  66. ज़ख़्म दिल का अब भरा तो चाहिये
  67. शहर अरमानों का जले अब तो
  68. उसे इश्क क्या है पता नहीं
  69. खुबसूरत दुकान है तेरी
  70. अपने मक़्सद से हटा कर तू नज़र
  71. फिर खुला मैंने दिल का दर रक्खा
  72. वफ़ाओं पे मेरी जफ़ा छा गई
  73. गई मुझको ये हवा जैसे
  74. किस से बचाऊँ अपना घर
  75. ज़िदगी यूँ भी जादू चलाती रही
  76. बिजलियाँ यूँ गिरीं उधर जैसे
  77. सुनामी की ज़द में रही जिंदगानी
  78. कैसी हवा चली है मौसम बदल रहे हैं
  79. कितनी लाचार कितनी बिस्मिल मैं
  80. किसी से कभी बात दिल की न कहना
  81. ज़िंदगी इस तरह से जीता हूँ
  82. क्या बताऊँ तुम्हें मैं कैसी हूँ
  83. कुछ तो इसमें भी राज़ गहरे हैं
  84. बेसबब बेरुख़ी भी होती है
  85. बंद हैं खिड़कियाँ मकानों की
  86. ज़िंदगी रंग क्या दिखाती है
  87. ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो
  88. नगर पत्थरों का नहीं आशना है
  89. रेत पर घर जो अब बनाया है
  90. चलें तो चलें फिक्र की आँधियाँ
  91. दर्द से दिल सजा रहे हो क्यों
  92. स्वप्न आँखों में बसा पाए न हम
  93. देखी तबदीलियाँ जमानों में
  94. लगती है मन को अच्छी
  95. ज़िंदगी मान लें बेवफ़ा हो गई
  96. पंछी उड़ान भरने से पहले ही डर गए
  97. ग़म के मारों में मिलेगा, तुमको मेरा नाम भी
  98. वो रूठा रहेगा उसूलों से जब तक
  99. जितना भी बोझ हम उठाते हैं
  100. जो मुझे मिल न पाया रुलाता रहा
  101. ख़ुशी का भी छुपा ग़म में कभी सामान होता है
  102. हैरान है ज़माना, बड़ा काम कर गए
  103. न सावन है न भादों है न बादल का ही साया है
  104. भटके हैं तेरी याद में जाने कहाँ कहाँ
  105. हम अभी से क्या बताएँ
  106. मिलने की हर खुशी में बिछड़ने का ग़म हुआ
  107. गुज़रे हुए सुलूक पे सोचो न इस क़द
  108. देते हैं ज़ख़्म ख़ार तो देते महक गुलाब
  109. किस्मत हमारी हमसे ही माँगे है अब हिसाब
  110. आँसुओं का रोक पाना कितना मुश्किल हो गया
  111. कौन किसकी जानता है आजकल दुश्वारियाँ
  112. साथ चलते देखे हमने हादसों के काफ़िले
  113. मेरा शुमार कर लिया नज़ारों में जाने क्यों
  114. शहर में उजड़ी हुई देखी
  115. क्यों मचलता है माजरा क्या है
  116. क्यों खुशी मेरे घर नहीं आती
  117. मेरा वजूद टूटके बिखरा यहीं कहीं
  118. रेत पर तुम बनाके घर देखो
  119. दोस्तों का है अजब ढब, दोस्ती के नाम पर
  120. उस शिकारी से ये पूछो पर क़तरना भी है क्या
  121. देख कर तिरछी निगाहों से वो मुस्काते हैं
  122. मेरे वतन की ख़ुशबू

लेखक की पुस्तकें

  1. दिल से ग़ज़ल तक
  2. भीतर से मैं कितनी खाली
  3. ऐसा भी होता है
  4. और गंगा बहती रही
  5. चराग़े दिल
  6. दरिया–ए–दिल
  7. एक थका हुआ सच
  8. लौ दर्दे दिल की
  9. पंद्रह सिंधी कहानियाँ
  10. परछाईयों का जंगल
  11. प्रांत प्रांत की कहानियाँ
  12. माटी कहे कुम्भार से
  13. दरिया–ए–दिल
  14. पंद्रह सिंधी कहानियाँ
  15. एक थका हुआ सच
  16. प्रांत-प्रांत की कहानियाँ
  17. चराग़े-दिल

लेखक की अनूदित पुस्तकें

  1. एक थका हुआ सच

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