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शिव संदेश

 

दूर कैलाश से जब शिव स्वर गूँजे, 
मानवता का सच्चा संदेश सुनाएँ। 
न कोई धर्म, न कोई जाति का भेद, 
सबमें एक ही चेतना, एक ही वेद। 
 
नीलकंठ बन जग को राह दिखाते, 
दुख सहकर सबका कल्याण करते। 
त्याग, करुणा और समता का सार, 
शिव में समाया सारा संसार। 
 
मोह-माया का अंत है निश्चित, 
संतोष में ही परम सुख निहित। 
भौतिकता में यदि उलझा मन, 
वह खो देता जीवन का धन। 
 
शिव का संदेश हमें यह बताता, 
प्रकृति से ही जीवन मुस्काता। 
संतुलन में ही सृष्टि का सार, 
यही है जीवन का सच्चा आधार। 
 
आओ फिर से यह प्रण करें, 
प्रकृति संग जीवन यापन करें। 
मानवता को धर्म बनाएँ, 
शिव के पथ पर क़दम बढ़ाएँ। 

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