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तरकीब 

 

एक छात्र ने कहानी लिखी और आवश्यक संशोधन के लिए अपने शिक्षक को दिखाई। शिक्षक ने कहानी को कई बार पढ़ा और बार-बार छात्र से पूछा, “बेटा, क्या तुमने यह कहानी ख़ुद लिखी है या मेरे पास किसी और की कहानी में शोध करवाने के लिए लाए हो?” 

छात्र ने बहुत शान्ति से उत्तर दिया, “जी सर, मैंने इसे ख़ुद लिखा है और यह मेरे साथ घटी एक घटना पर आधारित है। क्या यह सही नहीं है?” 

शिक्षक ने उसकी बहुत प्रशंसा की और कहा, “यह बहुत अच्छी कहानी है और तुमने इसे पात्रों के मनोविश्लेषण और कहानी कहने की तकनीक के अनुसार बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है। मेरी इच्छा है कि तुम इसे फ़लाँ समाचार पत्र में प्रकाशित होने के लिए भेजो। अगर यह उसमें प्रकाशित हो गई, तो तुम्हारा उत्साह बढ़ेगा और तुम्हें और लिखने की प्रेरणा मिलेगी।” 

शिक्षक के अनुरोध पर छात्र ने कहानी प्रकाशन के लिए भेज दी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी वह प्रकाशित नहीं हुई। निराश छात्र फिर शिक्षक के पास आया और पूरी बात बताई। शिक्षक ने कहानी प्रकाशित करवाने का एक और तरीक़ा सुझाया, और फिर तो कहानी पंद्रह दिनों में ही प्रकाशित हो गई। लेकिन कहानी पर एक स्थापित अंग्रेज़ी लेखक का नाम था, और अनुवादक के रूप में छात्र का नाम नीचे छपा था। 

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