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नव वर्ष

सागर में सब आँसू
बहाकर आ गया ।
सैलाब रौशनी का
जगाकर आ गया ।

किरनों के उजले रथ 
पर होकर सवार,
गागर सुधारस का 
छलकाकर आ गया।

पर्वतों- घाटियों में 
उछलता–कूदता,
रूप-नदी में गोता 
लगाकर आ गया ।

गुनगुनी धूप बनकर 
आँगन में उतरा;
नव वर्ष सब दूरियाँ 
मिटाकर आ गया ।
 

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