रिश्तों में इख़लास करना चाहिए
शायरी | ग़ज़ल सुशीला श्रीवास्तव1 Jul 2026 (अंक: 300, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
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रिश्तों में इख़लास करना चाहिए
प्यार का अहसास करना चाहिए
ग़र नवाज़ा है ख़ुदा ने कोई गुण
काम कोई ख़ास करना चाहिए
नफ़रतों की आग में जलना नहीं
प्रेम का अभ्यास करना चाहिए
ठोकरों से हारकर बैठे नहीं
ख़ुद पे भी विश्वास करना चाहिए
हो गये हो आज तुम धनवान तो
दान भी बिंदास करना चाहिए
प्यार की जब बात हो, इखलास हो
झूठ का परिहास करना चाहिए
जब उदासी छा रही हो दिल में तो
थोड़ा तो उल्लास करना चाहिए
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