उपदेश
कथा साहित्य | लघुकथा सपना चन्द्रा15 Sep 2026 (अंक: 302, द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)
सुंदर और सुसज्जित मंच पर विराजमान बाबा अपने सामने बैठे भक्तों से भक्ति से जुड़ने का मार्ग बता रहे थे।
बाबा बोले, “भक्तो! ईश्वर को पाना चाहते हो तो मोह, माया, स्वार्थ, झूठ, कपट से हमेशा दूर रहो।
भक्ति का मार्ग तुम्हें मोक्ष की ओर ले जाएगा। विलासिता पूर्ण जीवन ईश्वर से दूर कर देता है इसलिए ज़रूरी है कि तुम मन को अपने वश में रखो।”
भक्त ने अपना संशय प्रकट किया, “बाबाजी! ये जितनी चीज़ें आपने बताई हैं उनसे पीछा छुड़ाना बहुत कठिन लग रहा है। कैसे मोक्ष की प्राप्ति हो पायेगी फिर . . .?”
बाबा सगर्व मुस्कुराए, “तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। हर कोई ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता। यह दुनिया माया का जाल है जिसमें हम सभी उलझे हैं।”
भक्त चौंका, “बाबाजी! क्या आप भी . . .?”
बाबा भड़क उठे, “मूर्ख! मुझसे सवाल करता है।”
भक्त बोला, “आपका और मेरा ईश्वर अलग तो नहीं।”
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