अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

घुटन

जादू था 
या तिलस्म,
एक वर्ष
कब का बीत गया
पता ही नहीं चला।
 
इस संसार में
बस दो ही थे
एक- दूसरे में खोये
सब चिंताओं से मुक्त।
 
क्या-क्या नहीं हुआ, 
लड़ना-झगड़ना, 
रूठना-मनाना, 
इंतज़ार करना। 
मिलने के लिए 
नए-नए बहाने बनाना 
उसकी 
एक 
मुस्कान के लिए 
कितनी-कितनी 
झूठी-सच्ची 
बातें बनाना।
शायद
सब झूठ था,
शुरू से 
आभास होता था, 
यह एक सपना है, 
एक जादू है 
जो सच नहीं है ।
रात ख़त्म होगी,
सपना टूट जाएगा 
लेकिन 
कैसे झूठ मान लूँ, 
ज़िंदगी 
सपना नहीं है,
जिसे भूल जाऊँ।
 
वह 
याद बनकर 
चुभती रहती है
नहीं-नहीं
काँटा नहीं,
सबसे अलग है
यह दर्द,  
यह चुभन,
यह घुटन,
यह उदासी ,
जो शब्दों से ,
बयां नहीं होती।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं