वापसी
शायरी | नज़्म अवनीश कश्यप1 Jan 2026 (अंक: 291, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
मैं उसे भूल आया,
इस ग़म में कि
मैं कौन था?
मैं कौन था इंतज़ार में?
लम्हों के ख़ातिर,
पल-दो पल की बातों के ख़ातिर,
सपनों के ख़ातिर,
तो कभी नींद के ख़ातिर,
किताबों से लिपट, जानने मैं कौन था।
वापस ज़िंदगी के पते यूँ लौट आया,
मैं उसे भूल आया।
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